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महिला कर्मचारी: MATERNITY LEAVE बढ़ाकर 26 सप्ताह, विधेयक पारित

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Friday, 10 March 2017



नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को महिलाओं का मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने वाला मातृत्व अवकाश विधेयक पारित हो गया। मातृत्व अवकाश विधेयक को राज्यसभा में 11 अगस्त, 2016 में पारित किया गया था। कानून बनने के बाद 10 या अधिक व्यक्तियों को नियुक्त करने वाले संस्थानों पर यह कानून लागू होगा। बता दें कि कई राज्यों में सरकारें एवं विभागों में प्रमुख अधिकारी महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश के आवेदन स्वीकृत नहीं कर रहे थे परंतु अब विधेयक पारित हो जाने के बाद अफसर भी महिला कर्मचारियों से उनका यह अधिकार छीन नहीं पाएंगे।


गोद लेने वाली, कमिशनिंग मदर को भी मिलेगा अवकाश
मातृत्व अवकाश (संशोधन) विधेयक, 2016 के तहत तीन महीने से छोटे बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं और सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे की मां (कमिशनिंग मदर) को भी 12 सप्ताह तक का अवकाश देने का प्रवधान है। मातृत्व अवकाश की अवधि की शुरुआत गोद लेने वाली या सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे की मां को बच्चा सौंपे जाने से मानी जाएगी।

कानून ने बहुत सी सुविधाएं दी
इस विधेयक के पारित होने पर महिलाओं को मातृत्व अवकाश की अवधि समाप्त होने पर 'घर से काम' करने की सुविधा भी मिलेगी। साथ ही 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में क्रेच की सुविधा प्रदान करना अनिवार्य हो जाएगा। इतना ही नहीं, संशोधन विधेयक के कानून बनने के बाद नियोक्ताओं को महिलाओं को काम के बीच चार बार क्रेच में जाने की अनुमति देना भी अनिवार्य होगा।

पितृत्व अवकाश की मांग
केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने लोकसभा में विधेयक पेश किए जाने के समय कहा, "गर्भावस्था में महिलाओं की सुरक्षा बेहद गंभीर मसला है।" कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने इस बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि सरकार को मातृत्व अवकाश के साथ ही पितृत्व अवकाश का प्रावधान भी करना चाहिए।

कांग्रेस सदस्य ने उठाए सवाल
देव ने कहा, "इससे निजी क्षेत्र में महिलाओं को नौकरी मिलने में अड़चन आ सकती है। इससे निपटने के दो तरीके हैं। सरकार इसके लिए संस्थानों को वित्त पोषण कर सकती है या फिर पितृत्व अवकाश को भी अनिवार्य कर सकती है।" कांग्रेस सदस्य ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि दो बच्चों के जन्म के बाद मातृत्व अवकाश की अवधि कम क्यों की जा रही है।राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा।

जिसकों फोन किया, उसी से वारदात पक्की…

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Thursday, 9 March 2017


नीमकाथाना। राज्य में एटीएम से ठगी करने वालों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। यहां आए दिन वारदातें होने के बाद भी पुलिस आरोपियों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है। ऐसे ही दो वारदाते सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र में रहने वाले दो लोगों के साथ घटित हुई। आरोपियों ने दोनों के एटीएम कार्ड को ब्लॉक करके उनके खाते से 71 हजार रुपए निकाल लिए।

वारदात का शिकार फौजी पवन यादव नीमकाथाना इलाके का रहने वाला है। पुलिस ने बताया कि कुछ दिन पूर्व पीडित के फोन पर अज्ञात लोगों ने फोन किया। आरोपियों ने अपने आप को बैंककर्मी बताकर उसके एटीएम के पासवर्ड पूछ लिए। कुछ ही देर बाद पीडित के मोबाइल पर उसके खाते से 36 हजार रुपए ट्रांजेक्शन का मैसेज आया। इसी प्रकार दूसरी वारदात सिरोही निवासी बाबूलाल के साथ घटित हुई। पुलिस ने बताया कि उसके पास भी अज्ञात लोगों ने बैंककर्मी बनकर फोन किया और उसके खाते से 35 हजार रुपए निकाल लिए। पीडित को ठगी का पता लगने पर वह थाने पहुंचे और मामला दर्ज कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


राजस्थान में 300 डॉक्टरों का इस्तीफा, राज्यभर में STRIKE

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जयपुर। सरकार की ओर से मेडिकल अफसर को प्रोफेसर के बराबर करने से नाराजगी के चलते पहली बार राजस्थान के सबसे बड़े सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के प्रिंसिपल-अधीक्षक समेत 300 डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। डॉक्टरों के इस इस्तीफे से जहां एसएमएस में अघोषित बंद का सन्नाटा छाया है। बुधवार को अस्पताल में करीब 4000 लोग इलाज से वंचित रहे और 75 से अधिक ऑपरेशन टाल दिए गए। वहीं गुरुवार को राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों ने भी हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी है। ऐसे में प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था भगवान भरोसे ही है।

यह है पूरा मामला
राज्य सरकार की ओर से मेडिकल एजुकेशन में सुधार के लिए मेडिकल ऑफिसर (एमओ) को समतुल्य बोलकर सह आचार्य और आचार्य बनाने का आदेश जारी किया है। बुधवार को मेडिकल आॅफिसर्स को आचार्य के समतुल्य बनाए जाने के साथ सीधे मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति डॉक्टरों काे रास नहीं आई। सरकार के इसी फरमान के विरोध में एसमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल सहित सभी चिकित्सक शिक्षकों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।

फैसला वापस नहीं तो हड़ताल
एसएमएस अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे के साथ ही सरकार को यह चेतावनी भी दी है कि यदि वह अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो मजबूरन हड़ताल का रूख इख्तियार करना पड़ेगा। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों ने गुरूवार से हड़ताल पर चले जाएंगे।

तो क्या मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर भी खतरा?
मेडिकल कॉलेज के आचार्य और प्रिंसिपल की माने तो सरकार के इस फैसले से मेडिकल एजुकेशन के स्तर पर बुरा असर पड़ेगा। और ऐसा होता है तो एमसीआई (मेडिकल कौंशिल आॅफ इंडिया) से एसएमएस मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर भी खतरा मंडराने लगेगा।

सिर्फ 15 दिन में मिल जाएगा पीएफ का पैसा

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केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है कि जीपीएफ भविष्य निधि (जीपीएफ) से पैसा निकालने के नियमों में ढील दी गई है जिसके तहत अब उन्हें 15 दिन में पैसा मिल जाएगा.

इसके साथ ही कर्मचारी अब खास काम से अपने जीपीएफ का पैसा दस साल की नौकरी पूरा होने के बाद कभी भी निकाल सकेंगे. पहले यह सीमा 15 साल थी. जीपीएफ से अब पैसा प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के लिए और सभी संस्थानों हेतु निकाला जा सकेगा. इससे पहले केवल उच्च स्कूल स्तर पर ही जीपीएफ से पैसा निकाला जा सकता था.


मंत्रालय ने इस बारे में एक आदेश जारी किया है. इसके अनुसार,‘ अंशधारकों द्वारा उठाई गई चिंताओं के निवारण के लिए नियमों में समय-समय पर संशोधन किए जाते हैं.

हालांकि प्रावधान मोटे तौर पर प्रतिबंधात्मक ही रहते हैं. प्रावधानों में ढील और प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी.’ मंत्रालय ने केंद्र विभाग के सभी विभागों को भेजे आदेश में यह जानकारी दी है.
बदले नियमों के तहत, ‘12 महीने के वेतन या कुल अंशदान की तीन चौथाई राशि (जो भी कम हो) की निकासी की अनुमति देने का फैसला किया गया है.

बीमारी के मामले में अंशधारक के खाते की कुल राशि की 90 प्रतिशत तक राशि की निकासी की जा सकेगी. अंशधारक सेवा के 10 साल पूरे होने के बाद निकासी कर सकता है.’

जीपीएफ से राशि की निकासी टिकाऊ उपभोक्ता सामान फर्नीचर वगैरह खरीदने के लिए भी की जा सकती है. मौजूदा नियमों में यह तय नहीं था कि आवेदक को राशि का भुगतान कितने दिन में किया जाएगा.

मंत्रालय ने कहा है, ‘जीपीएफ से धन निकासी के आवेदन को मंजूरी व राशि के भुगतान के लिए 15 दिन की समयावधि तय की गई है. बीमारी या अन्य आपात स्थिति में यह सीमा घटाकर सात दिन भी हो सकती है.’

आतंकी के एनकाउंटर के बाद अब सिरे तलाशने की कोशिश, बॉस GM ख़ान पकड़ से बाहर!

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नई दिल्ली:  लखनऊ एनकाउंटर में यूपी एटीएस ने सैफुल्लाह को तो मार गिराया, उसके कई साथियों को पकड़ लिया लेकिन सैफुल्लाह जिस ग्रुप का सदस्य था, उसका सरगना अभी भी पकड़ से बाहर है. हैरान करने वाली बात तो ये है कि इस ग्रुप का सरगना एयरफोर्स में काम कर चुका है. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह आज संसद में एनकाउंटर पर बयान देने वाले हैं.

सैफुल्लाह को आतंकी बनाने वाला कहां है ?

लखनऊ में आतंकी सैफुल्लाह को 11 घंटे तक चले एनकाउंटर के बाद यूपी एटीएस ने मार गिराया था. भारी मात्रा में हथियार और बम बनाने का सामान इसके पास मिला, लेकिन इन सबके अलावा हैरान करने वाली बात ये है कि जिस ग्रुप का सैफुल्लाह सदस्य था उसका सरगना अभी तक पकड़ में नहीं आया है.


एयरफोर्स में काम कर चुका है फरार जीएम खान

ग्रुप के मुखिया का नाम जीएम खान है. जीएम खान कानपुर का ही रहने वाला है. एयरफोर्स में काम कर चुका है और अब फरार है. जीएम खान की तलाश में पुलिस कानपुर में उसके घर भी पहुंची थी, लेकिन घर बंद मिला. पड़ोसियों के मुताबिक वो लोगों से ज्यादा मिलता जुलता नहीं था.

NIA को सौंपी जा सकती है जांच

यूपी पुलिस ने गृहमंत्रालय को एफआईआर की कॉपी और पूरे मामले की रिपोर्ट भेज दी है. गृहमंत्रालय अब इसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह आज संसद में इस पर बयान देंगे. खबर आ रही हैं कि इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी जा सकती है.

IS की विचारधारा से प्रभावित था सैफुल्लाह

वहीं यूपी पुलिस के मुताबिक मारे गए आतंकी सैफुल्लाह और उसके साथियों का सीधा-सीधा कनेक्शन आतंकी संगठन आईएस से नहीं पाया गया है, बल्कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के ज़रिए वो संगठन की विचारधारा से प्रभावित थे.

सैफुल्लाह या उसके साथी भले ही आतंकी संगठन आईएस से सीधे ना जुड़े हुए हों, लेकिन उसकी विचारधारा पर चलते हुए आतंकी बन जाना देश के लिए बड़े खतरे का इशारा कर रहा है.

HOSTEL में लड़कियों को दरवाजा खोलकर कपड़ने बदलने के आदेश

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Wednesday, 8 March 2017



नई दिल्ली। केरल के एक गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को आदेश दिया गया है कि वे कपड़े बदलते समय भी दरवाजा बंद न करें। हॉस्टल प्रशासन के इस आदेश के बाद युवतियों में आक्रोश है। छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल प्रशासन का मानना है कि अगर उन्हें प्राइवेसी दी जाएगी, तो इससे होमोसेक्सुअल्टी बढ़ेगी। 



छात्राओं ने प्रिंसिपल पर आरोप लगाया है कि उनकी सोच है कि अगर लड़कियों ने दरवाजा बंद किया है, तो इसका मतलब है कि या तो वे चुपके से मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही हैं या फिर होमोसेक्सुअलिटी में संलिप्त हैं।

छात्राओं का आरोप है कि प्रिंसिपल जाति से जुड़ी टिप्पणियां भी करती हैं और विरोध करने पर बुरे परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है। छात्राओं के मुताबिक अब वे परेशान हो चुकी हैं। छात्राओं ने प्रिंसिपल के इस्तीफे की मांग की है। यह पूरा मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

राजनीतिक संकट केवल नाटक था मुलायम कुनबे का झगड़ा: अमर सिंह

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Thursday, 23 February 2017



नई दिल्ली। यूपी विधानसभा चुनावों से पहले सपा में मचे पारिवारिक घमासान को लेकर  शुरू से अटकलें चल रही थीं, लेकिन उसके बाद उनकी परतें अब खुलनी शुरू हो चुकी हैं और इन पर सबसे पहले मोहर लगाई है। सबसे पहले इन पर सपा के पूर्व वरिष्ठ नेता अमर सिंह ने मोहर लगाई है। अमर सिंह ने दावा किया कि पार्टी में कुछ समय पहले जारी राजनीतिक संकट एक सुनियोजित नाटक था। पार्टी से निकाले जाने के बाद लंबे वक्त से चुप्पी साधे बैठे अमर सिंह का लावा अब फूट पड़ा।



उन्होंने दावा किया कि यादव परिवार के बीच पैदा हुई कलह एक सोची-समझी साजिश थी और इसकी स्क्रिप्ट खुद मुलायम सिंह ने लिखी थी। अमर सिंह ने कहा कि सपा के पुरोधा मुलायम सिंह और उनके बेटे एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश एक हैं और एक ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित नाटक था जिसमें सब को भूमिकाएं दी गयी थीं। उन्होंने बाद में महसूस किया कि उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘मैंने महसूस किया कि यह सत्ता विरोधी लहर, कानून व्यवस्था की स्थिति से ध्यान भटकाने का एक हथकंडा था।

अपने बेटे के हाथों मुलायम सिंह यादव को हारना पसंद है और साइकिल, बेटा और सपा उनकी कमजोरियां हैं। मतदान के दिन भी पूरा परिवार साथ गया। इसलिए यह सब नाटक क्यों? बता दें कि प्रदेश में चुनावों से पहले यादव परिवार की अंदरुनी कलह खुलकर सामने आ गई। मुख्यमत्री अखिलेश सिंह यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह और चाचा शिवपाल सिंह के खिलाफ खुल कर बगावत कर दी थी।

मुलायम सिंह के साथ उस समय अमर सिंह भी थे। अखिलेश यादव ने अमर सिंह को बाहरी कहते हुए परिवार में कलेश की वजह भी बताया था। अमर सिंह ने कहा कि यह सब ड्रामा अखिलेश यादव की छवि सुधारने के लिए था। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह को साफ पता था कि चुनावों में उनके पास ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे लेकर जनता के सामने जाएं। इसलिए साहनभूति बटोरने के लिए यह सब किया गया था।

10 करोड़ रिलायंस जियो ग्राहकों के लिए स्पेशल प्लान का ऐलान

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मुंबई। हाल ही में मुकेश अंबानी ने मीडिया से बातचीत में बताया था कि जियो यूजर्स की संख्या 10 करोड़ पार हो गया है। वहीं रिलायंस जियो ने ग्राहकों का आंकड़ा 10 करोड़ पार होने पर एक बार फिर बड़ा ऐलान किया है। जियो ने एक नए प्लान की घोषणा की है। इस जियो प्राइम मेंबरशिप प्लान के मुताबिक ग्राहकों को अनलिमिटेड कॉलिंग और डेटा मिलेगा।


जियो के इस प्राइम मेंबरशिप प्लान में 99 रुपये की यह मेंबरशिप मौजूदा 10 करोड़ जियो ग्राहक और 31 मार्च 2017 तक जियो से जुड़ने वाले नए यूजर्स ही ले पाएंगे। इस योजना के तहत यूजर्स को 303 रुपये प्रति महीने में अनलिमिटेड कॉलिंग और अनलिमिटेड डेटा मिलेगा।

एक कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने कहा कि मौजूदा 10 करोड़ जियो यूजर्स एक तरह से जियो के सह-संस्थापक हैं। उन्होंने कहा कि इन यूजर्स के भरोसे के बाद अब हमारी ड्यूटी है कि उनको इसका फायदा मिल सके। उन्होंने कहा जियो औसतन हर सेकेंड अपने नेटवर्क पर सात ग्राहकों को जोड़ता है। उन्होंने कहा, "यह दुनिया में कहीं भी किसी भी प्रौद्योगिकी कंपनी की स्वीकृति का एक अभूतपूर्व स्तर है।"

अंबानी ने कहा कि रिलायंस जियो के शुरू होने से पहले भारत डेटा पेनिट्रेशन के मामले में 150वें स्थान पर था। अब यह पहले स्थान पर है। उन्होंने कहा, "जियो के ग्राहकों ने 100 करोड़ गीगा बाइट डेटा का उपभोग किया है। मोबाइल डेटा के प्रयोग के मामले में आज भारत दुनिया में नंबर एक है।"


माइ जियो ऐप, वेबसाइट या फिर स्टोर के जरिए यह मेंबरशिप ली जा सकती है। जियो प्राइम मेंबर्स को वक्त-वक्त पर नए ऑफर्स मिलते रहेंगे। ये ऑफर्स My Jio ऐप के जरिए मिलेंगे।

जियो प्राइम मेंबर्स को 10000 रुपये के सालाना वैल्यू वाली जियो के डिजिटल कॉन्टेंट की मेंबरशिप 31 मार्च 2018 तक फ्री मिलेगी। वहीं जियो का वादा है कि देश में किसी भी नेटवर्क पर वॉइस कॉलिंग फ्री रहेगी और रोमिंग का चार्ज भी नहीं लगेगा।

जियो प्राइम मेंबर्स को 31 मार्च 2018 तक जियो के हैपी न्यू इयर अनलिमिटेड प्लान वाले बेनिफिट्स मिलते रहेंगे यानी उन्हें अनलिमिटेड डेटा (1GB हाई स्पीड, बाकी 128 kbps) मिलता रहेगा। इसके लिए उन्हें हर महीने सिर्फ 303 रुपये चुकाने होंगे।

उन्होंने कहा कि हम न सिर्फ अन्य नेटवर्क्स के प्लान्स को मैच करेंगे बल्कि उनसे 20 फीसदी एक्स्ट्रा डेटा भी देंगे। जियो अन्य नेटवर्क्स के टैरिफ प्लान से भी सस्ते और बेहतर प्लान लाएगा। 31 मार्च 2017 तक जियो के हैपी न्यू इयर ऑफर के तहत डेटा अनलिमिटेड मिल रहा है, मगर 1 अप्रैल से कस्टम टैरिफ प्लान ऑफर किए जाएंगे। अभी तक जियो से जुड़ चुके ग्राहक और 31 मार्च 2017 से पहले जियो से जुड़ने वाले नए यूजर्स सिर्फ 99 रुपये में जियो प्राइम मेंबरशिप ले सकते हैं।

झारखंड के ललमटिया में खदान धंसी, 40-50 मजदूरों के दबे होने की आशंका, 35 डंपर भी धंसे

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Friday, 30 December 2016


झारखंड के ललमटिया में खदान धंसी, 40-50 मजदूरों के दबे होने की आशंका, 35 डंपर भी धंसे
रांची। झारखंड के गोड्डा जिले के ललमटिया इलाके में गुरुवार देर रात खदान धंसने के कारण कई मजदूर घायल हो गए। आशंका जताई जा रही है कि अभी भी 40-50 मजदूर खदान में दबे हैं। राहत एवं बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम पटना से रवाना हो गई है। जानकारी के मुताबिक ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (ईसीएल) की एक खदान में मिट्टी धंसने के कारण दो दर्जन से ज्यादा गाड़ियां और उनपर सवार कई लोग दब गए। बताया जा रहा है कि घटना के वक्त करीब 40 मजदूर खदान में काम कर रहे थे। इनमें से अभी तक 2 ही लोगों को बचाया जा सका है, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हादस के बाद राहत एवं बचाव कार्य के लिए फिलहाल स्थानीय पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों की मदद ली जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि एनडीआरएफ की एक टीम बचाव कार्य के लिए पटना से आ रही है, जो कुछ ही समय में घटनास्थल पर पहुंच जाएगी। हालांकि अभी प्रशासनिक तौर पर किसी भी मजदूर के मरने या घायलों की कोई सूचना नहीं दी गई है। हादसा चूंकि देर रात में हुआ इसलिए अंधेरा होने के कारण बचाव कार्य में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मजदूरों के साथ-साथ 35 डंपर और कई दूसरी खुदाई की मशीनें भी जमीन में धंसने की खबर है।

कांग्रेस ने ठहराया राज्य सरकार को जिम्मेदार

राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को हादसे की सूचना दे दी गई है और वे लगातार स्थिति एवं बचाव कार्य पर नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने घायलों को तुरंत उपचार में मदद के लिए रांची से हेलिकॉप्टर भेजने का भरोसा भी दिलाया है। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों से भी बचाव कार्य में तेजी लाने को कहा है। वहीं, इस हादसे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने हादसे के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य चल रहा है।

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Two key Malegaon blast accused were killed in custody: Ex-inspector

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Mumbai: In a startling revelation, a police officer who was part of the investigation into the 2008 Malegaon bombing has claimed that two key accused Sandeep Dange and Ramji Kalsangra were killed while they were in police custody.

Media reports on Friday quoted ex-inspector Mahboob Mujawar who himself is facing a trial in a separate case of alleged criminal intimidation and one under Arms Act as saying that the duo has been shown alive over the past eight years. Mujawar was deputed to the case by the then Director General of Police S S Virk.

Mujawar claims Dange and Kalsangra were killed by ATS officers.

Two police officers ACP Rajan Ghule and police inspector Ramesh More have already been under an investigation in a case relative to Dilip Patidar who has gone missing since 2008.

Patidar was brought from Indore to Mumbai for questioning in the same case but never returned home, his family claims. According to media reports Kalsangra stayed at Patidar's house as a tenant.
A blast rocked a busy street in Malegaon's Bhikku Chowk on September 29, 2008 killing eight and injuring several others. The Malegaon bombing coincided with a synchronous blast in Modasa in Gujarat.

The chargesheet filed by Maharashtra Anti-Terrorism Squad led by the then senior IPS officer Hemant Karkare had made the duo key accused in the case. Karkare was killed fighting with terrorists durig 26/11 Mumbai attacks.

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