भोपाल। व्यापमं की तरह अब मप्र के 1000 करोड़ के कटनी हवाला कांड में भी संबद्ध की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। 2 दिन पहले कोयला व्यापारी संतोष गर्ग मप्र में था। पुलिस को पता भी था लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया। आज उसकी मौत की खबर आ गई। पुलिस रिकॉर्ड में उसे फरार बताया जा रहा था। पुलिस ने उस पर 10 हजार का इनाम घोषित कर रखा था लेकिन गिरफ्तारी नहीं की जा रही थी। सवाल यह है कि ऐसे कौन से राज थे उसके दिल में जिसका खुलासा होने के कारण कोई बहुत बड़ा व्यक्ति प्रभावित हो सकता था और इसीलिए पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही थी। अंतत: उसकी संदिग्ध मौत हो गई। व्यापमं की तरह इस मौत का राज भी शायद कभी खुल नहीं पाएगा।
नोटबंदी के दौरान हवाला कारोबार का खुलासा होने पर पुलिस ने अमर की शिकायत पर संतोष के खिलाफ 22 दिसंबर 2016 को एफआईआर दर्ज की थी। तब से ही संतोष फरार था। कटनी पुलिस के मुताबिक उसकी तलाश में कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला था। संतोष की गिरफ्तारी से पुलिस को फर्जी फर्मों से हवाला और कोल कारोबारियों द्वारा किए जा रहे फर्जीवाड़े को लेकर कई अहम सुराग हाथ लग सकते थे, लेकिन अब इस संभावना पर पानी फिर सकता है।
ताज्जुब की बात यह है कि कटनी पुलिस के पास संतोष गर्ग की मौत की कोई अधिकृत सूचना भी नहीं है। इस बारे में जब पुलिस मुख्यालय में पदस्थ वरिष्ठ अफसर को इस घटनाक्रम से अवगत कराया गया तो उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो संतोष गर्ग के शव का पोस्टमार्टम कराने हरिद्वार पुलिस से संपर्क किया जाएगा।
हरिद्वार पुलिस कर रही निगरानी
संतोष गर्ग की मौत का प्रकरण हरिद्वार के किसी भी थाने में दर्ज नहीं हुआ है। जब मप्र के पत्रकारों ने हरिद्वार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की तब वहां हरकत शुरू हुई। उन्होंने तमाम थाना क्षेत्रों में सूचना देकर पिछले 24 घंटों में सभी संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत की जानकारी मांगी है। यह सारा काम आईजी हरिद्वार की निगरानी में हो रहा है।
गर्ग की मौत की खबर के बाद पता चला कि फरारी के दौरान उसकी पत्नी पुष्पा भी साथ थी। संतोष की सास ने बताया कि मंगलवार तड़के 3 बजे पुष्पा ने अपने बेटे प्रदीप को फोन कर संतोष की मौत की खबर दी। संतोष का 24 वर्षीय बेटा प्रदीप यूनियन बैंक में कार्यरत है। परिजन हरिद्वार के लिए निकल गए हैं।
हमें मालूम था वो यहां है, हमने गिरफ्तार नहीं किया: एसपी
कटनी एसपी शशिकांत शुक्ला का दावा है कि सूचना मिली थी कि दो दिन पहले संतोष सिहोरा में घर में था। गिरफ्तार क्यों नहीं किया? यह पूछने पर शुक्ला ने कहा कि ज्यादा शराब पीने के कारण संतोष की तबीयत गंभीर हो गई थी। इसलिए गिरफ्तारी नहीं की गई। याद दिला दें, ये वही आईपीएस अफसर हैं जिन्हे सीएम शिवराज सिंह ने मामले में हंगामा होने के बाद गौरव तिवारी को हटाकर भेजा है।
आईजी बोले- मुझे न मौत की सूचना, न बीमारी की
जबलपुर रेंज के आईजी डी श्रीनिवास राव का कहना है कि उन्हें न तो संतोष के बीमार होने की सूचना कटनी एसपी ने दी थी और ना ही आरोपी की मौत की कोई जानकारी मिली है। कटनी एसपी शशिकांत शुक्ला के मुताबिक, संतोष के परिजनों या फिर हरिद्वार पुलिस की तरफ से कोई सूचना नहीं मिली है। मुखबिर ने दो दिन पहले सूचना दी थी कि संतोष गंभीर रूप से बीमार है।

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